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पुराण विषय अनुक्रमणिका

PURAANIC SUBJECT INDEX

(Anapatya to aahlaada only)

by

Radha Gupta, Suman Agarwal, Vipin Kumar

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Anapatya - Antahpraak (Anamitra, Anaranya, Anala, Anasuuyaa, Anirudhdha, Anil, Anu, Anumati, Anuvinda, Anuhraada etc.)

Anta - Aparnaa ((Antariksha, Antardhaana, Antarvedi, Andhaka, Andhakaara, Anna, Annapoornaa, Anvaahaaryapachana, Aparaajitaa, Aparnaa  etc.)

Apashakuna - Abhaya  (Apashakuna, Apaana, apaamaarga, Apuupa, Apsaraa, Abhaya etc.)

Abhayaa - Amaavaasyaa (Abhayaa, Abhichaara, Abhijit, Abhimanyu, Abhimaana, Abhisheka, Amara, Amarakantaka, Amaavasu, Amaavaasyaa etc.)

Amita - Ambu (Amitaabha, Amitrajit, Amrita, Amritaa, Ambara, Ambareesha,  Ambashtha, Ambaa, Ambaalikaa, Ambikaa, Ambu etc.)

Ambha - Arishta ( Word like Ayana, Ayas/stone, Ayodhaya, Ayomukhi, Arajaa, Arani, Aranya/wild/jungle, Arishta etc.)

Arishta - Arghya  (Arishtanemi, Arishtaa, Aruna, Arunaachala, Arundhati, Arka, Argha, Arghya etc.)           

Arghya - Alakshmi  (Archanaa, Arjuna, Artha, Ardhanaareeshwar, Arbuda, Aryamaa, Alakaa, Alakshmi etc.)

Alakshmi - Avara (Alakshmi, Alamkara, Alambushaa, Alarka, Avataara/incarnation, Avantikaa, Avabhritha etc.)  

Avasphurja - Ashoucha  (Avi, Avijnaata, Avidyaa, Avimukta, Aveekshita, Avyakta, Ashuunyashayana, Ashoka etc.)

Ashoucha - Ashva (Ashma/stone, Ashmaka, Ashru/tears, Ashva/horse etc.)

Ashvakraantaa - Ashvamedha (Ashwatara, Ashvattha/Pepal, Ashvatthaamaa, Ashvapati, Ashvamedha etc.)

Ashvamedha - Ashvinau  (Ashvamedha, Ashvashiraa, Ashvinau etc.)

Ashvinau - Asi  (Ashvinau, Ashtaka, Ashtakaa, Ashtami, Ashtaavakra, Asi/sword etc.)

Asi - Astra (Asi/sword, Asikni, Asita, Asura/demon, Asuuyaa, Asta/sunset, Astra/weapon etc.)

Astra - Ahoraatra  (Astra/weapon, Aha/day, Ahamkara, Ahalyaa, Ahimsaa/nonviolence, Ahirbudhnya etc.)  

Aa - Aajyapa  (Aakaasha/sky, Aakashaganga/milky way, Aakaashashayana, Aakuuti, Aagneedhra, Aangirasa, Aachaara, Aachamana, Aajya etc.) 

Aataruusha - Aaditya (Aadi, Aatma/Aatmaa/soul, Aatreya,  Aaditya/sun etc.) 

Aaditya - Aapuurana (Aaditya, Aanakadundubhi, Aananda, Aanarta, Aantra/intestine, Aapastamba etc.)

Aapah - Aayurveda (Aapah/water, Aama, Aamalaka, Aayu, Aayurveda, Aayudha/weapon etc.)

Aayurveda - Aavarta  (Aayurveda, Aaranyaka, Aarama, Aaruni, Aarogya, Aardra, Aaryaa, Aarsha, Aarshtishena, Aavarana/cover, Aavarta etc.)

Aavasathya - Aahavaneeya (Aavasathya, Aavaha, Aashaa, Aashcharya/wonder, Aashvin, Aashadha, Aasana, Aasteeka, Aahavaneeya etc.)

Aahavaneeya - Aahlaada (Aahavaneeya, Aahuka, Aahuti, Aahlaada etc. )

 

 

Puraanic contexts for words like Aadi, Aatma/Aatmaa/soul, Aatreya,  Aaditya/sun etc. are given here.

Vedic contexts on Aatma/soul

आटरूष भविष्य १.१९३.९( आटरूष दन्तकाष्ठ का महत्त्व ), स्कन्द ७.१.१७( आटरूष दन्तकाष्ठ का महत्त्व )

 

आडि पद्म १.४४.५०( बक - भ्राता, पार्वती रूप धारण करके शिव के निकट गमन, शिव द्वारा वध ), ब्रह्माण्ड २.३.७२.७४( छठां आडि - बक नामक देवासुर संग्राम ), मत्स्य १५६( अन्धक - पुत्र, बक - भ्राता, तप से वर प्राप्ति, पार्वती रूप धारण, शिव द्वारा वध ), मार्कण्डेय ९.१०( परस्पर शाप - प्रतिशाप के कारण वसिष्ठ का आडि व विश्वामित्र का बक बनना, आडि - बक युद्ध का वर्णन ), वायु ८८.२५/२.२६.२५( आडि - बक नामक देवासुर संग्राम में इन्द्र का ककुत्स्थ राजा का वाहन बनना ), स्कन्द १.२.२९.१०( आडि दैत्य द्वारा पार्वती का रूप धारण, शिव द्वारा वध ), लक्ष्मीनारायण ३.१००.२०( आडी - बक नामक देवासुर संग्राम में शक्र/विष्णु द्वारा जम्भ के वध का उल्लेख ) Aadi/ adi

 

आतप भागवत ६.६.१६( विभावसु व उषा - पुत्र, पञ्चयाम - पिता ), ११.१९.९( आतपत्र : उद्धव द्वारा कृष्ण के चरणयुगल की आतपत्र से उपमा ), द्र. शातातप Aatapa

 

आतापी लक्ष्मीनारायण १.५४५.८( इल्वल व वातापी - भ्राता, अगस्त्य के समक्ष आतापी का पर्णशाला व वातापी का फल बनना, अगस्त्य द्वारा भस्म करना ) Aataapee/ atapi

 

आत्म देवीभागवत ७.३६.६( प्रणव धनुष, शर आत्मा, ब्रह्म लक्ष्य ), पद्म १.१९.३०२( आत्मा के यमन से यम की प्राप्ति का कथन ), २.७+ ( ज्ञान का संग त्याग पञ्चेन्द्रियों से मैत्री पर आत्मा को दुःख प्राप्ति, वीतराग के उपदेश से विवेक, ज्ञान प्राप्ति ), २.१२०.३०( आत्मा के शुद्धात्मा व अन्तरात्मा भेदों का कथन ), ६.२२६.२७( मकार रूपी पञ्चविंश आत्मा का कथन ), ब्रह्म २.४७( आत्म ज्ञान प्राप्ति हेतु आत्म तीर्थ का वर्णन, दत्तात्रेय द्वारा शिव की स्तुति ), ब्रह्मवैवर्त्त ३.७.७४( नारायण आत्मा, मन ब्रह्मा, ज्ञान रूपी महेश्वर, पांच प्राण विष्णु, बुद्धि ईश्वरी आदि का उल्लेख ), ब्रह्माण्ड १.२.३२.१०४( आत्मवान् : २१ मन्त्रकर्ता भार्गव ऋषियों में से एक ), भविष्य ४.१८५( आत्म प्रतिकृति दान विधि ), भागवत ६.४.४६( धर्म के आत्मा होने का उल्लेख ),११.२३.४५( आत्मा के जीव का सनातन सखा होने का उल्लेख, आत्मा = सुपर्ण ; आत्मा द्वारा मन रूप सखा पर आश्रित होने पर गुणों से निबद्ध होने का कथन ), ११.२८( आत्मा, माया से परे की स्थिति ), मत्स्य १४५.९८( आत्मवान् : १९ मन्त्रकर्ता भार्गव ऋषियों में से एक ), वायु ५९.९६( आत्मवान् : २१ मन्त्रकर्ता भार्गव ऋषियों में से एक ), ६५.९०/२.४.९०( आत्मवान् : च्यवन व सुकन्या - पुत्र, दधीचि - भ्राता ), स्कन्द १.१.२०.९( परा आत्मा के त्रिगुणों के लीन हो जाने से आत्मा की लिङ्ग संज्ञा का कथन ), २.६.२.११( राधा के आत्माराम कृष्ण की ध्रुव आत्मा होने का उल्लेख ), ५.२.६२.२२( आत्मा का आत्मा बन्धु इत्यादि श्लोक ), ५.३.१५९.८( गुरु के आत्मवानों का शास्ता होने का उल्लेख ), महाभारत आश्वमेधिक २५.१५( ब्रह्मात्मा/बुद्धि के उद्गाता होने का उल्लेख ), योगवासिष्ठ ३.१.१२( आत्मा के ऋत व परब्रह्म के सत्य होने का उल्लेख ; मन की भूतात्मा संज्ञा ), ३.६३.२( आत्मा की सर्वशक्तिता के कारण आत्मा द्वारा विभिन्न शक्तियों को आंशिक रूप में प्रकट करना ), ४.२२( विशुद्ध ज्ञान प्राप्त होने पर आत्मा की प्रसन्नता का वर्णन ), ६.१.५९( आत्म अवबोध हेतु चित्त स्पन्दन - अस्पन्दन ज्ञान का कथन ), ६.२.४०( आत्मा की विश्रान्ति पर जगत का स्वप्नवत् भासित होना ), ६.२.७३( विराट आत्मा की स्थिति का वर्णन ), महाभारत वन ३१३.७१( पुत्र के आत्मा होने का उल्लेख : यक्ष - युधिष्ठिर संवाद ), शान्ति ७३.१९( मनुष्य की देह में आत्मा के रुद्र होने का कथन ),२०३, २१८, लक्ष्मीनारायण २.३९.९( आत्मा नदी, शील तीर्थ, सत्य जल ), २.२५७.२( देह के विभिन्न अङ्गों से आत्मा के विनिष्क्रमण पर विभिन्न लोकों की प्राप्ति का वर्णन ), ३.१०६.७( आत्मा : औरस पुत्र का रूप ), ४.१०१.१०९( आत्मबोधिनी : कृष्ण व पिङ्गला - पुत्री ) Aatma/ aatmaa/atma

Vedic contexts on Aatma

 

आत्मदेव पद्म ६.१९६( धुन्धली - पति, धुन्धुकारी व गोकर्ण - पिता, भागवत माहात्म्य प्रसंग )

 

आत्रेय ब्रह्म २.७०( इन्द्र के वैभव की स्पर्द्धा में आत्रेय द्वारा कृत्रिम इन्द्रपुरी का निर्माण, असुरों द्वारा इन्द्र के भ्रम में आत्रेय का बन्धन, आत्रेय द्वारा इन्द्र की स्तुति व पूर्व स्थिति में लौटना ), ब्रह्माण्ड १.२.११.२२( अनसूया से पांच आत्रेय पुत्रों का जन्म ), महाभारत शान्ति २३४.२२, अनुशासन १५०.३४, वराह १०.२०( आत्रेय द्वारा राजा सुप्रतीक को पुत्र प्राप्ति का वरदान, इन्द्र को शाप ), १८७.२८( निमि - पुत्र, आत्रेय की मृत्यु पर निमि का शोक, श्राद्ध करना ), वायु ६२.१७( स्वारोचिष मन्वन्तर में ऋषि ), ६२.४१/२.१.४१( तामस मन्वन्तर में ऋषि ), ६२.५४/२.१.५४( रैवत मन्वन्तर में ऋषि ), १००.११/२.३८.११( भविष्य के मन्वन्तर के सप्तर्षियों में से एक ), १००.६७/२.३८.६७( नवम मन्वन्तर में ऋषि ), १००.८२( ११वें मन्वन्तर में ऋषि ), १००.९६( १२वें मन्वन्तर में ऋषि ), १००.१०७( १३वें मन्वन्तर में ऋषि ), शिव ५.३४.४१( दशम मन्वन्तर में ऋषियों में से एक? ), ५.३४.४६( दशम मन्वन्तर में सप्तर्षियों में से एक ), स्कन्द ३.२.९.९५( आत्रेय गोत्र के ऋषियों के ५ प्रवरों व गुणों का कथन ), ७.१.२५७( सौराष्ट्र देश में विप्र, एकत, द्वित व त्रित का पिता, त्रित के कूप में पतन की कथा ), द्र. स्वस्त्यात्रेय Aatreya/ atreya

 

आत्रेयी ब्रह्म २.७४( अत्रि - पुत्री, अङ्गिरस - पत्नी, पति के परुष वचनों की शान्ति के लिए परुष्णी नदी बनना ), वामन ८२.४( वीतमन्यु - भार्या, उपमन्यु - माता, पुत्र को क्षीर प्राप्ति हेतु विरूपाक्ष शिव की आराधना करने का आदेश ), द्र. अपाला Aatreyee

 

आदम भविष्य ३.१.४.१८( हव्यवती - पति, विष्णु कर्दम से उत्पत्ति, आत्म ध्यान परायण, पाप वृक्ष के नीचे फल भक्षण, म्लेच्छ पुत्रों की उत्पत्ति )

 

आदिकेश ब्रह्म २.९९.३( वेद व व्याध द्वारा आदिकेश शिव की भक्ति, व्याध की भक्ति से आदिकेश शिव का प्रसन्न होना )

 

आदित्य अग्नि ५१.५( द्वादश आदित्यों के स्वरूप, वर्ण व शक्तियां ), गरुड ३.५.३२(६ आदित्यों के नाम), नारद १.७०.२०( द्वादश आदित्यों का महाविष्णु की १२ मूर्तियों के साथ न्यास ), १.१२१.५४( आदित्य द्वादशी व्रत : १२ आदित्यों के नाम ), पद्म १.६.३५( चाक्षुष मन्वन्तर के तुषित देवों का वैवस्वत मन्वन्तर में १२ आदित्य बनना, आदित्यों के नाम ), १.२५( आदित्य शयन व्रत, नक्षत्रों में सूर्य नाम व न्यास ), १.४०.१४५( अव्यक्त आनन्द सलिल वाले समुद्र में १२ आदित्यों की महाद्वीपों से उपमा ), ४.२२.२९( आदित्यवर्चस : व्याध द्वारा आदित्यवर्चस के वध की संक्षिप्त कथा ), ब्रह्म १.२८.२८( १२ आदित्य मूर्तियों की विश्व में स्थिति का वर्णन ), ब्रह्माण्ड १.२.२३.१( आदित्य रथ व्यूह का वर्णन ), भविष्य १.४८+ ( साम्बादित्य का माहात्म्य : साम्ब व वासुदेव का संवाद ), १.५०.१३( मास अनुसार आदित्यों के नाम ), ३.४.६.५५+ ( ब्राह्मण रूप धारी इन्द्र, धाता आदित्यों के विशिष्ट कार्यों का वर्णन ), ३.४.७.८५( निम्बादित्य : अरुण व जयन्ती - पुत्र, सुदर्शन चक्र के तेज का अवतार, निम्ब में तेज स्थापना से कृत्रिम सूर्य का निर्माण ), ३.४.१८.१६( संज्ञा के स्वयंवर में आदित्यों का असुरों से युद्ध ), ४.४४( आदित्य मण्डल दान विधि ), भागवत ६.६.३९( १२ अदिति - पुत्रों के नाम ), ६.१८.१( सविता, भग, धाता, वरुण, मित्र, विष्णु नामक आदित्यों की भार्याएं व पुत्र ), मत्स्य १९.३( प्रपितामह का रूप ), ५५( आदित्य शयन व्रत की विधि व माहात्म्य, नक्षत्र अनुसार आदित्य न्यास ), ९७( आदित्य वार कल्प विधान, द्वादश दल कमल पर दिशा अनुसार आदित्य पूजा ), १७२.३३( आदित्य नारायण : सागर में महाद्वीप का रूप ), लिङ्ग १.५९( मास अनुसार आदित्यों के नाम, रश्मि संख्या व वर्ण ), वराह ६२( सार्वभौम राजा द्वारा पद्म ग्रहण के प्रयास से कुष्ठ प्राप्ति, आदित्य आराधना से मुक्ति ), ९४( आदित्यों का १२ महिषासुर - सेनानियों से युद्ध ), १३८( आदित्य तीर्थ माहात्म्य के अन्तर्गत खञ्जरीट का मनुष्य बालक बनना ), १५६.१४( कृष्ण द्वारा यमुना में कालिय दमन के पश्चात् द्वादश आदित्यों की स्थापना ), १७७( साम्ब द्वारा प्रात: आदि तीन कालों में तीन आदित्यों की आराधना ), वायु ६६.४४( रात्रि के १५ मुहूर्त्तों में से एक ), १०१.३०/२.३९.३०( आदित्यों की भुव:लोक में स्थिति का उल्लेख ), विष्णु १.१५.१३२( चाक्षुष मन्वन्तर के तुषित देवों का वैवस्वत मन्वन्तर में आदित्य बनना ), विष्णुधर्मोत्तर १.१२०.३( विष्णु के अंश साध्यगण का अदिति के गर्भ से जन्म लेकर १२ आदित्य बनना ), ३.१८२( द्वादश आदित्य व्रत विधि ), ३.३२१.१४( दया से आदित्य लोक की प्राप्ति ), शिव २.१.१२.३३( आदित्यों द्वारा ताम्रमय लिङ्ग की पूजा ), २.५.३६.१४( आदित्य गण का शङ्खचूड - सेनानियों से युद्ध ), ५.३.२८( घोर संवर्तक आदित्य का शाप से कृष्ण - पुत्र साम्ब बनने का उल्लेख ), स्कन्द १.२.४३.१६( भट्ट/नारद द्वारा स्थापित भट्टादित्य का माहात्म्य ), १.२.४९.१( जयादित्य की उत्पत्ति का वर्णन ), १.२.५१.५४( कमठ द्विज बालक द्वारा स्थापित जयादित्य का माहात्म्य ), ३.१.४९.५४( आदित्य - कृत रामेश्वर शिव की संक्षिप्त स्तुति ), ४.१.४६.४५( काशी में १२ आदित्यों के नाम ), ४.२.५१.२८( वृद्ध आदित्य का माहात्म्य : वृद्ध हारीत द्वारा आराधना से तारुण्य प्राप्ति ), ४.२.५१.४४( आदित्यों द्वारा केशव/हरि के निर्देश पर केशवादित्य नामक शिवलिङ्ग की आराधना ), ४.२.५१.८३( विमल क्षत्रिय द्वारा कुष्ठ से मुक्ति हेतु विमलादित्य की स्थापना ), ४.२.५१.१०१( आदित्यों द्वारा गङ्गा की आराधना ), ४.२.८४.१७( आदित्य केशव तीर्थ का संक्षिप्त माहात्म्य ), ५.१.७०.५१( १२ आदित्यों के नाम ), ५.३.१७.१३( सृष्टि संहरण काल में १२ आदित्यों का रुद्र मुख से उत्पन्न होकर भूमण्डल को जलाना ), ५.३.२८.१२( बाण के त्रिपुर नाश हेतु शिव के रथ में आदित्य व चन्द्र के रथचक्र में स्थित होने का उल्लेख ), ५.३.५९( आदित्य तीर्थ का माहात्म्य ), ५.३.६०( आदित्य तीर्थ का माहात्म्य, तीर्थ में स्नान से ब्रह्महत्या आदि पापों का कुरूपा स्त्रियों के रूप में अलग होना ), ५.३.१५३( आदित्येश्वर तीर्थ का माहात्म्य, जाबालि द्वारा कुष्ठ निवारण हेतु तप ), ५.३.१९१( द्वादश आदित्य तीर्थ माहात्म्य, द्वादश आदित्यों की प्रलय काल में दिशाओं के सापेक्ष स्थिति ), ५.३.२३१.११( रेवा - सागर संगम पर १० आदित्य तीर्थों की स्थिति का उल्लेख ), ६.५६( साम्बादित्य का माहात्म्य : गालव द्वारा पुत्र प्राप्ति के लिए आराधना ), ६.६०.९( नरादित्य का माहात्म्य : अर्जुन द्वारा स्थापित सूर्य आदित्य ), ६.१५५+ ( पुष्पादित्य का माहात्म्य, याज्ञवल्क्य द्वारा स्थापना, पुष्प द्विज द्वारा आराधना का वृत्तान्त ), ६.२५२.३४( चातुर्मास में आदित्यों की जपा वृक्ष में स्थिति का उल्लेख ), ६.२७८.९६( याज्ञवल्क्य द्वारा पुन: वेद प्राप्ति के लिए १२ आदित्यों की स्थापना ), ७.१.१७( आदित्य की निरुक्ति, माहात्म्य ), ७.१.४३( आदित्येश्वर लिङ्ग का माहात्म्य : समुद्र द्वारा रत्नों से पूजा ), ७.१.१००+ ( साम्बादित्य का माहात्म्य ), ७.१.१०१.५८( आदित्य के १२ अतिरिक्त नाम, मास अनुसार आदित्यों के नाम, रश्मि संख्या ), ७.१.११८( गोप्यादित्येश्वर का माहात्म्य : कृष्ण की १६ सहस्र गोपियों/१६ कलाओं द्वारा स्थापना ), ७.१.१२८.२१( २१ आदित्यों के नाम ), ७.१.१३९( तीर्थों में आदित्यों के नाम ), ७.१.२५६( नन्दादित्य का माहात्म्य, नन्द राजा द्वारा पद्म ग्रहण के प्रयास से कुष्ठ रोग प्राप्ति, आदित्य आराधना से कुष्ठ से मुक्ति ), ७.१.३०५( नारदादित्य का माहात्म्य : नारद द्वारा जरा से मुक्ति हेतु नरादित्य की आराधना ), हरिवंश १.३.६२( चाक्षुष मन्वन्तर के तुषित देवों का वैवस्वत मन्वन्तर में आदित्य बनना ),महाभारत आदि २२६.३४ (धाता, द. आदि आदित्यों का खाण्डव दाह प्रसंग में कृष्ण व अर्जुन से युद्ध) वन ३१३.४५( आदित्य के उदित व अस्त होने में ब्रह्म व धर्म के कारण होने का कथन : यक्ष - युधिष्ठिर संवाद ), अनुशासन १०२.३२ (आदित्य लोक को प्राप्त होने वाले मनुष्य के लक्षण : इन्द्र गौतम संवाद ), योगवासिष्ठ ४.३६( चित् रूपी आदित्य के स्वरूप का वर्णन ), वा.रामायण ६.१०५( आदित्य हृदय स्तोत्र, रावण पर विजय हेतु अगस्त्य द्वारा राम को कथन ), लक्ष्मीनारायण १.८३.५६( काशी में दिवोदास के राज्य में स्थित आदित्य के १२ रूपों के नाम ), १.२०८.२२( आदित्य तीर्थ : आदित्यों द्वारा तप करके सूर्यता प्राप्ति ), १.३११.३७( आदित्यवर्णा : समित्पीयूष नृप की ८७ पत्नियों में से एक, कृष्ण को कटक व भुजबन्ध अर्पित करना ), १.३५३.२८( साम्ब द्वारा कुष्ठ से मुक्ति हेतु मथुरा में ६ सूर्यों की आराधना ), १.४४१.८८( आदित्यों का जपा वृक्ष रूप में अवतरण ), १.५३८.४६( १२ आदित्यों द्वारा मास अनुसार प्रभास क्षेत्र में स्नान ), १.५४३.७६( दक्ष द्वारा आदित्य को अर्पित १२ कन्याओं के नाम ), २.१७८.६१( आरण्यक मुनि व उनके २५ सहयोगी ऋषियों का १४ मनु व १२ आदित्य बनना, पुन: १२ आदित्यों का राजाओं के रूप में जन्म ), ३.४५.२७( पञ्चाग्नि तप से आदित्य मण्डल की प्राप्ति का उल्लेख ), ३.५३.१००( ब्रह्मा द्वारा स्वपुत्रों को कर्म में प्रवृत्त होने का आदेश, पुत्रों का आदित्य नाम ), कथासरित् १.५.५९( आदित्यवर्मा : राजा,मन्त्री शिववर्मा के वध की युक्ति ), ३.४.६९( आदित्यसेन : उज्जयिनी का राजा, श्रीवृक्षक नामक अश्व की सहायता से कठिनाइयों पर विजय का वर्णन, विदूषक ब्राह्मण द्वारा पुत्री की रक्षा ), ७.८.२००( आदित्यप्रभा : विद्याधर - कन्या, पद्मसेन - भार्या, श्वसुर के शाप से यमदंष्ट्रा रूप में जन्म लेना ), ८.६.१५९( आदित्यशर्मा : सुलोचना नामक यक्षिणी को सिद्ध करके उससे पुत्र प्राप्त करना ), द्र. कोणादित्य, चन्द्रादित्य, जयादित्य, नरादित्य, बालादित्य, भट्टादित्य, मधुरादित्य, यमादित्य, रामादित्य, विक्रमादित्य, सूर्य Aaditya/ aditya

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